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हिंदी | Explainer

दादी का सवाल: “बेटा, यह वीडियो सच है या नहीं?

एक परिवार की बातचीत, जो आसान भाषा में समझाती है कि ट्रस्ट आइडेंटिटी प्रोटोकॉल (TIP) कैसे बताता है कि कोई चीज़ किसने और कैसे बनाई।

Mohan Funde, अतिथि लेखक16 सितंबर 202610 मिनटMedium पर भी पढ़ें
सच है या नहीं? एक टैप में जानिए, किसने बनाया और कैसे। मानव-निर्मित, AI की मदद से, AI-निर्मित और मिश्रित, ये चार लेबल, साथ में The AI Lab की लाख की मुहर।

सच है या नहीं? TIP की मुहर बताती है कि इसे किसने और कैसे बनाया।

यह कहानी काल्पनिक है। लेकिन ऐसे पल आज लगभग हर घर में आते हैं।

रविवार की सुबह, फ़ैमिली ग्रुप

रविवार की सुबह थी। कमला दादी चाय का कप लिए फ़ोन पर फ़ैमिली वॉट्सऐप ग्रुप देख रही थीं। एक वीडियो आया था, जिसमें एक जाने-माने अभिनेता किसी “पक्के मुनाफ़े” वाली निवेश योजना की तारीफ़ कर रहे थे।

“अनन्या, ज़रा देखो तो,” दादी ने कॉलेज में पढ़ने वाली अपनी पोती को आवाज़ दी। “यह सच है या नहीं? चेहरा तो वही है, आवाज़ भी वही।”

अनन्या ने वीडियो देखा और मुस्कुराई। “दादी, आजकल चेहरा और आवाज़ दोनों बनाए जा सकते हैं। AI से।”

दादी कुछ पल चुप रहीं। फिर धीरे से बोलीं, “पिछले हफ़्ते शर्मा जी को भी एक फ़ोन आया था। आवाज़ बिल्कुल उनके बेटे जैसी थी, पैसे माँग रहा था। बाद में पता चला, बेटा तो दफ़्तर की मीटिंग में बैठा था।”

अनन्या की अपनी परेशानी

अनन्या को भी कुछ याद आ गया। उसे फ़ोटोग्राफ़ी का शौक है। पिछले महीने उसकी खींची हुई मानसून की एक तस्वीर किसी और के पेज पर हज़ारों लाइक्स बटोर रही थी। उसका नाम कहीं नहीं था।

“पता है दादी,” उसने कहा, “हम सब रोज़ इंटरनेट पर तीन सवाल पूछते हैं, भले ही ज़ोर से न पूछें:”

  • यह सच है या नहीं?
  • इसे बनाया किसने?
  • कहीं मेरा काम कोई चुरा तो नहीं लेगा?

“पहले हम अंदाज़े से जवाब दे देते थे। नाम देखकर, लिखने का ढंग देखकर, लोगो देखकर। AI ने वह अंदाज़ा बेकार कर दिया है। नकली आवाज़ असली लगती है, नकली तस्वीर सच्ची लगती है।”

हमें बेहतर अंदाज़े की ज़रूरत नहीं है। हमें पक्का जानने का तरीका चाहिए।

चाय पर समझाया गया TIP

“तो इसका कोई इलाज है?” दादी ने पूछा।

“है,” अनन्या बोली। “इसका नाम है ट्रस्ट आइडेंटिटी प्रोटोकॉल, छोटा नाम TIP। यह The AI Lab का बनाया एक मुफ़्त और खुला मानक है। इसे तीन आसान बातों में समझिए।”

पहली बात: पहचान, बस एक बार

“जैसे बैंक में खाता खोलते समय एक बार KYC होती है, वैसे ही रचना बनाने वाला व्यक्ति एक बार अपनी पहचान की पुष्टि करवाता है। यह काम एक मान्यता प्राप्त Verification Provider करता है। इसके बाद उसे एक TIP-ID मिलती है। एक इंसान, एक TIP-ID।”

(KYC सिर्फ़ समझाने का उदाहरण है। TIP बैंक की KYC नहीं है।)

“और मेरा चेहरा, मेरी आवाज़, वह सब कहीं रख लिया जाता है?” दादी ने तुरंत पूछा।

“नहीं दादी। कच्चा बायोमेट्रिक डेटा कभी सहेजा नहीं जाता। बस एक बार पुष्टि होती है।”

दूसरी बात: हर रचना पर मुहर

“जब वह व्यक्ति कोई फ़ोटो, वीडियो, लेख या गाना प्रकाशित करता है, तो उस पर डिजिटल हस्ताक्षर करता है। यह TIP ब्राउज़र एक्सटेंशन (Chrome, Firefox, Safari), WordPress प्लगइन या API से होता है। हर रचना को एक स्थायी पहचान मिलती है, जिसे Content Trust ID (CTID) कहते हैं। समझिए, रजिस्ट्री की मुहर लगी रसीद।”

“और साथ में एक लेबल भी लगता है,” अनन्या ने आगे कहा। “आपने खाने के पैकेट पर हरा और लाल निशान देखा है न? एक नज़र में पता चल जाता है कि अंदर क्या है। TIP के लेबल भी वैसे ही हैं, बस चार हैं:”

  • मानव-निर्मित (Original Human, OH): पूरी तरह इंसान की बनाई हुई, AI ने इसमें कुछ भी नहीं बनाया।
  • AI की मदद से (AI-Assisted, AA): मुख्य रचनाकार इंसान है, AI ने सुधारने, सुझाव देने या निखारने में मदद की।
  • AI-निर्मित (AI-Generated, AG): मुख्य रचना AI ने की, इंसान ने निर्देश दिए, चुना या सजाया।
  • मिश्रित (Mixed, MX): एक से ज़्यादा स्रोतों से इंसान और AI का काम मिलाकर।

तीसरी बात: जाँच, कोई भी कर सकता है

“अब असली बात,” अनन्या ने फ़ोन उठाया। “कोई भी पढ़ने वाला उस रचना के साथ लगा TIP बैज टैप करता है, या उसकी CTID लिंक खोलता है। तुरंत दिखता है कि इसे किसने बनाया, कौन-सा लेबल है, और बनने के बाद इसमें कोई बदलाव हुआ या नहीं। न कोई खाता बनाना, न कोई पैसा देना। किसी भी प्लैटफ़ॉर्म पर।”

“यानी अगर उस अभिनेता वाले वीडियो पर ऐसी मुहर नहीं है…” दादी ने सोचते हुए कहा।

“…तो उसे आँख मूँदकर आगे मत भेजिए,” अनन्या हँसी। “मुहर न होने का मतलब यह नहीं कि वीडियो नकली ही है। लेकिन मुहर होने का मतलब है कि एक असली, पहचाना हुआ इंसान उसकी ज़िम्मेदारी ले रहा है।”

“और तुम्हारी तस्वीर?”

“तो क्या TIP तुम्हारी तस्वीर को चोरी होने से बचा लेता?” दादी ने पूछा।

अनन्या ने ईमानदारी से कहा, “नहीं दादी। TIP किसी को कॉपी करने से नहीं रोकता, और न ही किसी AI मॉडल को उस पर ट्रेनिंग लेने से। लेकिन यह साबित करता है कि तस्वीर किसने और कब बनाई। अगर मैंने अपनी तस्वीर पर पहले ही हस्ताक्षर किए होते, तो उस पेज से बहस करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। मैं बस तारीख़ वाला, हस्ताक्षर किया हुआ रिकॉर्ड दिखा देती, जो उस कॉपी से पहले का है, और कोई भी उसे कुछ ही सेकंड में जाँच लेता।”

यह सबूत है, ताला नहीं।

“और अगर कोई झूठा लेबल लगा दे? AI से बनाकर लिख दे कि इंसान ने बनाया?”

“लेबल बनाने वाले की अपनी घोषणा होती है। TIP उस घोषणा को हस्ताक्षरित, सार्वजनिक और जवाबदेह बनाता है। गलत लेबल पर आपत्ति उठाई जा सकती है, और उसके लिए एक विवाद प्रक्रिया है।”

“पर भरोसा किस पर करें?”

दादी का आख़िरी सवाल सबसे समझदारी भरा था: “जो सिस्टम बताता है कि किस पर भरोसा करें, उसी पर भरोसा क्यों करें?”

अनन्या ने उंगलियों पर गिनाया:

  • मुफ़्त: आम लोगों के लिए हस्ताक्षर करना मुफ़्त है, और जाँच करना सबके लिए हमेशा मुफ़्त।
  • विकेंद्रीकृत: सार्वजनिक रिकॉर्ड अलग-अलग स्वतंत्र नोड्स सँभालते हैं। किसी एक कंपनी का उस पर कब्ज़ा नहीं है।
  • अपरिवर्तनीय: रिकॉर्ड सिर्फ़ जोड़े जाते हैं। किसी रिकॉर्ड को चुपचाप बदला या मिटाया नहीं जा सकता। सुधार भी एक नए हस्ताक्षरित रिकॉर्ड के रूप में जुड़ता है।
  • खुला: इसका मानक CC BY 4.0 के तहत प्रकाशित है। कोई भी इसे पढ़ सकता है, इस्तेमाल कर सकता है और इस पर कुछ नया बना सकता है।
  • क्वांटम-सुरक्षित: हस्ताक्षर ML-DSA-65 (NIST FIPS 204) जैसे पोस्ट-क्वांटम मानक से होते हैं, जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के सामने भी टिके रहने के लिए बने हैं।

“और इसे कोई एक कंपनी नहीं चलाती,” अनन्या ने जोड़ा। “इसकी देखरेख स्वतंत्र AI Trust Council करती है, जिसमें पाँच समूहों को बराबर वोट मिलता है।”

नियम भी इसी दिशा में

पास बैठे पापा, जो अब तक अख़बार पढ़ रहे थे, बोल पड़े: “नए नियम भी तो इसी दिशा में हैं।”

वे सही थे। भारत में सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में किए गए 2026 के संशोधन (IT Amendment Rules, 2026) 20 फ़रवरी 2026 से लागू हैं। इनके तहत प्लैटफ़ॉर्म को प्रकाशन से पहले उपयोगकर्ताओं से यह घोषणा लेनी होती है कि सामग्री कृत्रिम रूप से बनाई गई है या नहीं, ऐसी सामग्री पर साफ़ दिखने वाला लेबल लगाना होता है, और जहाँ तकनीकी रूप से संभव हो, मेटाडेटा या स्रोत की जानकारी जोड़नी होती है।

यूरोप में EU AI Act का अनुच्छेद 50 भी 2 अगस्त 2026 से AI-निर्मित सामग्री को मशीन के पढ़ने लायक तरीके से चिह्नित करना ज़रूरी बनाता है।

TIP इन नियमों की जगह नहीं लेता। यह लोगों और संस्थाओं को ऐसा सबूत देता है, जिसे कोई भी जाँच सकता है।

एक नज़र में

  • यह सच है या नहीं? चार साफ़ लेबल बताते हैं: मानव-निर्मित, AI की मदद से, AI-निर्मित या मिश्रित।
  • इसे बनाया किसने? पहचान-सत्यापित इंसान का डिजिटल हस्ताक्षर।
  • कहीं मेरा काम चोरी न हो जाए? तारीख़ वाला, हस्ताक्षरित सबूत, जो किसी भी कॉपी से पहले का है।
  • यह सब होता कैसे है? एक बार पहचान, हर रचना पर हस्ताक्षर, और कोई भी एक टैप में जाँच सकता है।

उस दिन के बाद

उस रविवार के बाद कमला दादी ने अपने लिए एक नियम बना लिया। कोई भी “चौंकाने वाला” वीडियो आगे भेजने से पहले वे खुद से एक सवाल पूछती हैं: “इस पर मुहर है?”

और अनन्या ने अपनी अगली तस्वीर पोस्ट करने से पहले उस पर हस्ताक्षर किए।

जिस चीज़ पर TIP की मुहर है, उसकी सच्चाई जानना अब अंदाज़े का खेल नहीं, बस एक टैप की बात है।

और अब, सीधे आपसे

कमला दादी और अनन्या की कहानी यहीं थमती है। पर यह सवाल सबसे गहरा उन लोगों को चुभता है, जिनका हुनर ही उनकी पहचान है। इसलिए अब सीधी बात, भारत के हर रचनाकार से।

भारत की अदालतें भी जाने-माने कलाकारों के नाम, चेहरे और आवाज़ के AI से बिना अनुमति इस्तेमाल पर रोक लगा चुकी हैं। लेकिन अदालत का आदेश नुकसान होने के बाद आता है। TIP का हस्ताक्षर पहले दिन से आपकी रचना के साथ रहता है।

गायक, गायिकाएँ और संगीतकार

आपकी आवाज़ ही आपकी पहचान है, और आज उसकी हूबहू नकल कुछ ही मिनटों में बन जाती है। कल किसी चैनल पर आपकी आवाज़ में ऐसा गीत बज सकता है, जो आपने कभी गाया ही नहीं। अपनी हर मूल रिकॉर्डिंग और हर रिलीज़ पर TIP से हस्ताक्षर कीजिए। फिर आपके श्रोता एक टैप में जान लेंगे कि कौन-सा गीत सचमुच आपके गले से निकला है। और अगर मिक्सिंग या मास्टरिंग में AI की मदद ली है, तो “AI की मदद से” का लेबल आपकी ईमानदारी भी दर्ज करता है।

फ़िल्मकार, अभिनेता और पूरी फ़िल्मी दुनिया

रिलीज़ से पहले “लीक” हुई क्लिप, किसी सितारे का चेहरा लगाकर बना नकली विज्ञापन, ऐसा पोस्टर जिसे आपने कभी मंज़ूरी नहीं दी। अपने आधिकारिक ट्रेलर, पोस्टर, गीत और प्रचार सामग्री पर हस्ताक्षर कीजिए, ताकि दर्शक असली और नकली का फ़र्क़ ख़ुद जाँच सकें। और जहाँ कहानी कहने में AI ने हाथ बँटाया है, वहाँ सही लेबल लगाना दर्शकों के भरोसे को और गहरा करता है।

YouTubers, रील बनाने वाले और पॉडकास्टर

आपकी मेहनत की रील किसी और के पेज पर वायरल, आपके चेहरे वाला नकली प्रमोशन, आपकी आवाज़ में कोई झूठी “स्पॉन्सर्ड” घोषणा। एक ही TIP-ID हर प्लैटफ़ॉर्म पर चलती है, चाहे YouTube हो, Instagram हो या कोई और जगह। अपने हर वीडियो पर हस्ताक्षर कीजिए, ताकि आपके दर्शक पहचान सकें कि असली चैनल कौन-सा है।

फ़ोटोग्राफ़र, चित्रकार और डिज़ाइनर

अनन्या की मानसून वाली तस्वीर याद है? जिस एक फ़्रेम के लिए आपने घंटों सही रोशनी का इंतज़ार किया, उसका श्रेय किसी और को न मिले। पोस्ट करने से पहले हस्ताक्षर कीजिए, और आपके पास हर कॉपी से पहले का, तारीख़ वाला सबूत रहेगा।

लेखक, कवि और शायर

कितनी ही कविताएँ और शेर वॉट्सऐप पर किसी और के नाम से घूमते रहते हैं। अपनी रचना जहाँ पहली बार प्रकाशित करें, वहीं उस पर हस्ताक्षर कीजिए। फ़ॉरवर्ड में नाम भले बदल जाए, मूल रिकॉर्ड नहीं बदलता, और जो सच जानना चाहे, वह उसे जाँच सकता है।

पत्रकार और समाचार संस्थान

किसी चैनल का लोगो लगा नकली “ब्रेकिंग न्यूज़” कार्ड कुछ ही घंटों में हज़ारों फ़ोनों तक पहुँच जाता है। अपनी हर ख़बर पर संस्थान का हस्ताक्षर कीजिए, ताकि आपकी बायलाइन पर भरोसा अंदाज़ा नहीं, जाँची हुई बात हो। संपादकीय उपयोग के लिए समाचार संस्थानों को TIP मुफ़्त मिलता है।

दुकानदार और छोटे कारोबारी

आपकी दुकान के नाम से घूमता नकली “मेगा सेल” मैसेज, या आपके नाम से की गई कोई झूठी घोषणा। अपनी आधिकारिक पोस्ट, ऑफ़र और घोषणाओं पर हस्ताक्षर कीजिए, ताकि ग्राहक जान सकें कि संदेश सचमुच आपका है। सालाना $100K से कम आय वाले छोटे कारोबारों के लिए TIP मुफ़्त है।

आप हिंदी में लिखते हों, भोजपुरी में गाते हों, तमिल में फ़िल्में बनाते हों या मराठी में कविता करते हों, TIP हर भाषा की रचना पर एक जैसा काम करता है। हस्ताक्षर आपकी रचना पर होता है, भाषा पर नहीं।

आपका हुनर आपकी पहचान है। उस पर आपके नाम की मुहर भी होनी चाहिए।

आप भी शुरुआत करें

  • पढ़ें और जाँचें: TIP ब्राउज़र एक्सटेंशन इंस्टॉल करें, या सामने आई कोई भी CTID लिंक खोलें।
  • अपना काम सुरक्षित करें: vp.theailab.org पर मुफ़्त TIP-ID प्राप्त करें, और जो भी प्रकाशित करें, उस पर हस्ताक्षर करें।
  • और जानें: प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी और श्वेत पत्र theailab.org पर मुफ़्त पढ़ें।
  • अगर ठगी हो जाए: देर मत कीजिए। राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें, या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। और याद रखें, कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।

Mohan Funde, The AI Lab Insights के अतिथि लेखक हैं। इस लेख में व्यक्त विचार उनके अपने हैं।

Medium पर भी प्रकाशित: दादी का सवाल: “बेटा, यह वीडियो सच है या नहीं?”